Property Registration – भारत में संपत्ति खरीदना हमेशा से एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय रहा है। लाखों परिवार अपनी मेहनत की कमाई से जमीन, मकान या प्लॉट खरीदने का सपना देखते हैं। लेकिन अब यह प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाई जा रही है, जिससे हर खरीदार को सतर्क रहने की जरूरत है।
वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य बेनामी संपत्ति की खरीद पर रोक लगाना और काले धन के प्रवाह को नियंत्रित करना है। सरकार चाहती है कि हर संपत्ति का वास्तविक मालिक स्पष्ट रूप से पहचाना जा सके।
पत्नी के नाम संपत्ति और नए नियमों का संदर्भ
भारतीय परिवारों में यह परंपरा काफी पुरानी है कि पति अपनी पत्नी के नाम पर जमीन या मकान खरीदते हैं। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे परिवार की सुरक्षा, संपत्ति का बेहतर प्रबंधन, या कर योजना। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी तरह वैध है और आयकर कानून भी इसकी अनुमति देता है।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कुछ लोग इस व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए अपनी अवैध या अघोषित संपत्ति पत्नी के नाम पर दिखाकर कर विभाग की नजर से बचने की कोशिश करते थे। ऐसे मामलों में पत्नी केवल नाममात्र की मालिक होती थी, जबकि वास्तविक नियंत्रण पति के पास ही रहता था। यही वह खामी थी जिसे बंद करने के लिए नए नियम लाए गए हैं।
भुगतान के स्रोत की पारदर्शिता क्यों जरूरी है
नई व्यवस्था के अंतर्गत संपत्ति की रजिस्ट्री के समय यह बताना अनिवार्य हो गया है कि जो राशि संपत्ति खरीदने में लगाई जा रही है, वह किसकी आय से आई है। यदि पत्नी के नाम पर प्लॉट खरीदा जा रहा है और उसके लिए पति की आय का उपयोग हो रहा है, तो इसे कानूनी रूप से उपहार या पारिवारिक हस्तांतरण के रूप में दर्शाना होगा। इसके लिए उचित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
रजिस्ट्रेशन विभाग अब आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड की मांग कर सकता है। नकद में किए गए भुगतान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और ऐसे लेनदेन में अतिरिक्त जांच की संभावना बढ़ गई है। इसलिए खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे हर भुगतान बैंकिंग माध्यम से करें ताकि लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है
यदि पत्नी की अपनी स्वतंत्र आय है, जैसे कि वे नौकरीपेशा हैं, व्यवसाय चलाती हैं या उनके पास कोई अन्य आय स्रोत है, तो उनकी वेतन पर्ची, आयकर रिटर्न या बैंक विवरण प्रस्तुत करने से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सरल हो जाती है। ऐसे मामलों में यह सिद्ध करना आसान होता है कि संपत्ति की खरीद उनके स्वयं के धन से की गई है।
दूसरी ओर, यदि पत्नी गृहिणी हैं और संपत्ति खरीदने का पैसा पति की तरफ से आ रहा है, तो एक वैध गिफ्ट डीड तैयार करवाना आवश्यक हो सकता है। इस डीड में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि पति ने पत्नी को यह राशि उपहार के रूप में दी है। इसके साथ बैंक ट्रांसफर का प्रमाण और दोनों पक्षों के पैन कार्ड की जानकारी भी जरूरी होती है।
राज्यवार नियमों में भिन्नता को समझें
यह ध्यान देने योग्य बात है कि संपत्ति पंजीकरण के नियम पूरे भारत में एक समान नहीं हैं। हर राज्य का अपना पंजीकरण विभाग होता है और वह केंद्रीय दिशानिर्देशों के आधार पर अपने राज्य में नीतियां बना सकता है। इसलिए जो नियम महाराष्ट्र में लागू हों, जरूरी नहीं कि वही उत्तर प्रदेश या राजस्थान में भी हों।
किसी भी संपत्ति की खरीद से पहले स्थानीय उपनिबंधक कार्यालय या राज्य के पंजीकरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम नियमों की जानकारी लेना बेहद जरूरी है। इससे न केवल रजिस्ट्रेशन के समय होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है, बल्कि भविष्य में किसी कानूनी उलझन से भी राहत मिलती है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष सतर्कता
सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों के लिए संपत्ति घोषणा पहले से ही अनिवार्य रही है, लेकिन नए नियमों के बाद यह और अधिक सख्त हो गई है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी वैध आय से पत्नी के नाम पर जमीन खरीदता है, तो उसे अपने विभाग को भी इसकी सूचना देनी होती है। भुगतान का स्रोत पूरी तरह स्पष्ट और दस्तावेजी रूप में उपलब्ध होना चाहिए।
ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता संपत्ति जब्ती या विभागीय कार्रवाई का कारण बन सकती है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर किसी वित्तीय या कानूनी सलाहकार की मदद लेनी चाहिए।
नए नियमों का दीर्घकालिक प्रभाव
इन नियमों से शुरुआती दौर में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया थोड़ी जटिल और समय लेने वाली हो सकती है। कुछ सौदों में देरी भी हो सकती है क्योंकि दस्तावेजों की जांच अधिक गहराई से की जाएगी। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह बदलाव देश के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
जब हर संपत्ति का वास्तविक मालिक स्पष्ट होगा और हर लेनदेन का स्रोत दर्ज होगा, तो संपत्ति विवाद में कमी आएगी। साथ ही, टैक्स चोरी और बेनामी संपत्ति जैसी समस्याएं भी नियंत्रण में आएंगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
आगे क्या करें, कुछ व्यावहारिक सुझाव
संपत्ति खरीदने से पहले अपने सभी वित्तीय दस्तावेज जैसे आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और पैन कार्ड अपडेट रखें। यदि पत्नी के नाम पर खरीद की जा रही है और धन आपकी आय से आ रहा है, तो एक वकील की मदद से गिफ्ट डीड तैयार करवाएं।
बड़े लेनदेन में हमेशा चार्टर्ड अकाउंटेंट या अनुभवी संपत्ति वकील की सलाह लें। किसी भी धनराशि का भुगतान नकद की बजाय बैंक चेक, NEFT या RTGS के माध्यम से करें ताकि लेनदेन का पूरा डिजिटल ट्रेल उपलब्ध रहे। याद रखें, एक छोटी सी सावधानी आपको भविष्य की बड़ी परेशानियों से बचा सकती है।









