Land Registry Documents – भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री हमेशा से एक पेचीदा और जोखिम भरी प्रक्रिया रही है। आए दिन ऐसी खबरें सामने आती हैं जिनमें लोगों को फर्जी कागजात के आधार पर ठगा गया या एक ही जमीन को कई लोगों के नाम पर बेच दिया गया। इन घटनाओं ने न केवल लोगों की मेहनत की कमाई को नष्ट किया, बल्कि न्यायालयों पर भूमि विवादों का भारी बोझ भी डाल दिया। ऐसे हालात में सरकार का यह कदम बेहद जरूरी और सराहनीय है।
देश भर की अदालतों में जमीन-जायदाद से जुड़े लाखों मुकदमे वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। इन विवादों का मुख्य कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और दस्तावेजों की जांच में लापरवाही रही है। कई बार खरीदार को यह पता ही नहीं होता कि जिस जमीन को वह खरीद रहा है, उस पर पहले से कोई कानूनी विवाद चल रहा है। इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार ने भूमि पंजीकरण प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए हैं।
नए नियमों के अंतर्गत सबसे पहला और महत्वपूर्ण बदलाव पैन कार्ड को अनिवार्य करने से जुड़ा है। जमीन की रजिस्ट्री के वक्त अब संपत्ति खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों को अपना पैन कार्ड प्रस्तुत करना होगा। इससे हर लेन-देन का वित्तीय रिकॉर्ड सरकार के पास सुरक्षित रहेगा और काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाना आसान होगा। पारदर्शिता के इस उपाय से संपत्ति बाजार में हेरफेर की संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी।
इसके साथ ही दोनों पक्षों की पासपोर्ट साइज फोटो भी पंजीकरण दस्तावेजों में संलग्न करना जरूरी कर दिया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की पहचान का दुरुपयोग करके फर्जी तरीके से रजिस्ट्री न करा सके। पहचान की पुष्टि के इस उपाय से धोखाधड़ी की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इस बदलाव को सरकार की दूरदर्शी सोच का नतीजा कहा जा सकता है।
आधार कार्ड को भी इस पूरी प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया गया है। आधार के जरिए व्यक्ति के नाम, पते और बायोमेट्रिक डेटा की सटीक जांच की जाएगी, जिससे असली और नकली व्यक्ति के बीच फर्क करना बेहद आसान हो जाएगा। बायोमेट्रिक सत्यापन यानी उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली की पहचान से किसी भी तरह की जालसाजी लगभग असंभव हो जाएगी। यह तकनीकी सुरक्षा कवच भूमि रजिस्ट्री को पहले से कहीं अधिक विश्वसनीय बनाएगा।
खसरा और खतौनी जैसे पुराने जमीन के रिकॉर्ड का अब डिजिटल माध्यम से सत्यापन किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी भी संपत्ति का इतिहास कुछ ही पलों में स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। अगर किसी दस्तावेज में कोई गड़बड़ी है या उस जमीन पर पहले से कोई विवाद है, तो वह तुरंत उजागर हो जाएगा। इससे खरीदार को जमीन खरीदने से पहले ही पूरी सच्चाई का पता चल जाएगा।
एक और नया और अहम प्रावधान यह है कि संपत्ति पर यदि किसी प्रकार का नगर निगम कर, बिजली का बकाया या अन्य कोई सरकारी देनदारी है, तो उसे पहले चुकाना जरूरी होगा। बकाया राशि की रसीदें जमा किए बिना पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह नियम नए खरीदार को उन कानूनी और वित्तीय बोझों से बचाएगा जो पिछले मालिक की लापरवाही के कारण उत्पन्न हुए थे। इससे खरीदार को भविष्य में किसी अनचाही परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बढ़ते कदमों के साथ-साथ भूमि पंजीकरण प्रणाली को भी पूरी तरह ऑनलाइन करने की कोशिश की जा रही है। अनेक राज्यों में अब घर बैठे ही आवेदन करना, दस्तावेज अपलोड करना और स्टांप ड्यूटी जैसे शुल्क का भुगतान करना संभव हो गया है। इस सुविधा से न केवल लोगों का समय बचता है, बल्कि सरकारी दफ्तरों में होने वाली भीड़ और दलालों की मनमानी भी खत्म होती है। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण संपत्ति से जुड़ी जानकारी किसी भी वक्त कहीं से भी जांची जा सकती है।
ऑनलाइन प्रणाली में यह भी देखा जा सकता है कि किसी जमीन पर बैंक का कर्ज बकाया है या वह गिरवी रखी हुई है। ऐसी संपत्ति को खरीदना खरीदार के लिए भविष्य में मुसीबत बन सकता है, इसलिए यह जानकारी पहले से उपलब्ध होना बेहद फायदेमंद है। डिजिटल प्रणाली के जरिए पुराने और नए दोनों प्रकार के रिकॉर्ड को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इससे एक केंद्रीयकृत डेटाबेस तैयार होगा जो पूरे देश में संपत्ति संबंधी जानकारी को एकीकृत करेगा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि भूमि का विषय संविधान के अनुसार राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए इन नए नियमों के क्रियान्वयन में राज्य से राज्य में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिल सकता है। किसी भी संपत्ति का लेन-देन करने से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नवीनतम दिशा-निर्देश जरूर पढ़ें। साथ ही किसी अनुभवी वकील या विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उचित रहेगा।
कुल मिलाकर सरकार के ये नए बदलाव आम नागरिक के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास हैं। इनसे भूमि बाजार में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जब पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल हो जाएगी, तब आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा। यह पहल निश्चित रूप से एक न्यायपूर्ण और भ्रष्टाचारमुक्त भारत के निर्माण में योगदान देगी।









