PM Kisan 22th Installment – भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की अर्थव्यवस्था की नींव में किसान का पसीना और मेहनत शामिल है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपनी रोजी-रोटी के लिए खेती-बाड़ी पर निर्भर है। लेकिन बदलते मौसम, बढ़ती लागत और घटती आमदनी ने किसानों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं होती।
केंद्र सरकार ने किसानों की इसी पीड़ा को समझते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के जरिए देशभर के पात्र किसानों को हर साल एक निश्चित राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म करके डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से यह सहायता दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सरकारी मदद का पूरा लाभ सीधे किसान तक पहुंचे।
योजना की संरचना और उद्देश्य
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र किसान परिवार को सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह पूरी राशि एक साथ नहीं बल्कि तीन अलग-अलग किस्तों में भेजी जाती है, जिससे किसान को नियमित अंतराल पर मदद मिलती रहती है। हर किस्त दो हजार रुपये की होती है और यह चार महीने के अंतर पर जारी की जाती है। इस तरह साल में तीन बार किसान के खाते में पैसे आते हैं जो उसकी छोटी-बड़ी जरूरतों में काम आते हैं।
इस योजना का मूल उद्देश्य यह है कि किसान बीज खरीदने, खाद लाने या सिंचाई की व्यवस्था करने के लिए किसी से उधार न मांगे। कृषि कार्य में शुरुआती खर्च अक्सर किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन जाता है। इस सहायता राशि से वे अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर सकते हैं और साहूकारों के चंगुल से बाहर निकल सकते हैं। यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक प्रयास है।
22वीं किस्त का इंतजार
बीते नवंबर 2025 में सरकार ने 21वीं किस्त किसानों के खातों में सफलतापूर्वक भेजी थी। अब देशभर के करोड़ों किसान 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि फरवरी 2026 के मध्य तक यह अगली किस्त जारी हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, इसलिए किसानों को सरकारी सूचनाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
किस्त जारी होने की प्रतीक्षा में अक्सर किसान अनिश्चितता की स्थिति में रहते हैं। इसीलिए जरूरी है कि वे अपने दस्तावेज और पंजीकरण की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें। जिन किसानों के सभी कागजात सही हैं और ई-केवाईसी पूरी है, उन्हें किस्त मिलने में कोई अड़चन नहीं आएगी। बाकी किसानों को जल्द से जल्द अपनी प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए ताकि वे इस लाभ से वंचित न रहें।
कौन हैं इस योजना के असली हकदार
सरकार ने इस योजना के लिए कुछ स्पष्ट पात्रता मानदंड तय किए हैं जिनका पालन जरूरी है। सबसे पहली शर्त यह है कि लाभार्थी भारतीय नागरिक हो और उसके नाम पर कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व हो। राज्य सरकार के राजस्व अभिलेखों में उनकी जमीन का सही ब्यौरा दर्ज होना अनिवार्य है। यदि भूमि रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी है तो किस्त रुक सकती है।
इसके अलावा परिवार में यदि कोई सदस्य सरकारी पद पर कार्यरत है या आयकर भरता है तो उस परिवार को इस योजना का लाभ नहीं मिलता। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि वास्तव में जरूरतमंद किसान परिवारों को प्राथमिकता दी जा सके। बैंक खाता सक्रिय होना और उसमें डीबीटी की सुविधा चालू होना भी अनिवार्य है। ये सभी शर्तें यह सुनिश्चित करती हैं कि सरकारी मदद सही लोगों तक पहुंचे।
ई-केवाईसी क्यों है इतनी जरूरी
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने ई-केवाईसी को इस योजना के लिए अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद यह है कि फर्जी लाभार्थियों को योजना से बाहर किया जा सके और असली किसानों को उनका हक मिले। यदि किसी किसान ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है तो उनकी किस्त रोकी जा सकती है। इसलिए यह काम जल्द से जल्द पूरा करना बेहद जरूरी है।
ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया अब बेहद सरल हो गई है। किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर या स्वयं पोर्टल पर ऑनलाइन भी यह काम कर सकते हैं। आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के जरिए कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। एक बार ई-केवाईसी हो जाने के बाद किसान को बार-बार यह प्रक्रिया नहीं दोहरानी पड़ती।
पेमेंट स्टेटस जांचने का तरीका
आज के डिजिटल युग में किसान घर बैठे अपनी किस्त की स्थिति जांच सकते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां लाभार्थी स्थिति यानी Beneficiary Status वाले विकल्प पर क्लिक करके अपना आधार नंबर या पंजीकरण संख्या दर्ज करनी होगी। ओटीपी सत्यापन के बाद सभी किस्तों की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।
यदि कोई किस्त जारी हुई है तो उसका ट्रांजेक्शन नंबर और तारीख भी देखी जा सकती है। यह सुविधा किसानों को पारदर्शिता का एहसास दिलाती है और वे हर जानकारी खुद देख सकते हैं। यदि खाते में पैसे नहीं आए हैं तो वे वेबसाइट पर ही समस्या की वजह भी जान सकते हैं। इस तरह की डिजिटल सुविधाएं किसानों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाती हैं।
किस्त न आने पर क्या करें
यदि निर्धारित समय के बाद भी खाते में राशि नहीं आती तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह जांचें कि ई-केवाईसी और आधार लिंकिंग की स्थिति क्या है। इसके बाद बैंक खाते में डीबीटी सुविधा सक्रिय है या नहीं, यह भी सुनिश्चित करें। यदि कोई तकनीकी समस्या है तो बैंक में जाकर उसे ठीक कराना सबसे आसान उपाय है।
सरकार ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक हेल्पलाइन सेवा भी शुरू की है। इस नंबर पर कॉल करके किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और समाधान पा सकते हैं। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी होने पर संबंधित राजस्व विभाग से संपर्क करना चाहिए। सही जानकारी और सही कदम उठाकर हर किसान अपनी किस्त समय पर प्राप्त कर सकता है।
किसान की उम्मीद और सरकार की जिम्मेदारी
यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसान के मन में विश्वास जगाने का काम भी करती है। जब एक छोटे किसान को यह पता होता है कि सरकार उसके साथ खड़ी है, तो उसकी हिम्मत और बढ़ जाती है। खेती में होने वाले नुकसान के बाद भी वह फिर से जुताई करने का साहस जुटा पाता है। यही मानसिक मजबूती किसी भी सरकारी योजना की सबसे बड़ी सफलता होती है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि यह योजना सही दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन किसानों को भी चाहिए कि वे अपने दस्तावेज सही रखें, ई-केवाईसी पूरी करें और सरकारी जानकारी से जुड़े रहें। जागरूक किसान ही इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकता है। सरकार और किसान दोनों मिलकर चलें तो देश की कृषि व्यवस्था निश्चित रूप से मजबूत होगी।









