E Shram Card Kist – भारत के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मेहनतकश मजदूरों के जीवन में एक नई उम्मीद की लहर आई है। लंबे समय से जो श्रमिक अपनी बकाया सहायता राशि का इंतजार कर रहे थे उनके लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस बार खास बात यह है कि तीनों लंबित किस्तें एक साथ लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही हैं। प्रत्येक किस्त ₹3000 की होने के कारण कुल ₹9000 की धनराशि एक ही बार में खाते में पहुंचेगी।
यह निर्णय उन लाखों परिवारों के लिए बेहद मायने रखता है जो दिन-रात मेहनत करके भी आर्थिक असुरक्षा के साये में जीते हैं। दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए ₹9000 की एकमुश्त राशि घर के कई जरूरी खर्च पूरे करने में सहायक बन सकती है। सरकार ने इस राशि को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए भेजने का फैसला किया है ताकि हर रुपया सीधे हकदार के पास पहुंचे। इस व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होती है बल्कि बिचौलियों द्वारा होने वाली धांधली पर भी प्रभावी रोक लगती है।
ई-श्रम योजना की नींव केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने रखी थी और इसका मूल उद्देश्य असंगठित मजदूरों को एक डिजिटल पहचान देना था। जो करोड़ों श्रमिक अब तक सरकारी योजनाओं की परिधि से बाहर थे उन्हें इस पंजीकरण के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ा गया है। पोर्टल पर नाम दर्ज होते ही श्रमिक दुर्घटना बीमा, आर्थिक सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों के दायरे में आ जाते हैं। यह योजना असल में एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को संकट की घड़ी में सहारा देता है।
बकाया किस्तें एक साथ क्यों भेजी जा रही हैं, इसके पीछे एक तार्किक कारण है। दरअसल अनेक श्रमिकों के पिछले भुगतान तकनीकी अड़चनों, दस्तावेजों में कमियों या सत्यापन में हुई देरी के कारण अटके हुए थे। सरकार ने अब इन सभी मामलों को एकत्रित करके एक साथ निपटाने का निर्णय लिया है जिससे लाभार्थियों को एकमुश्त राहत मिल सके। यह फैसला सरकार की उस मंशा को दर्शाता है कि किसी भी पात्र श्रमिक को उसके अधिकार से वंचित न रहने दिया जाए।
इस योजना के लाभार्थियों की सूची बहुत व्यापक है और इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के मेहनतकश लोग शामिल हैं। राजमिस्त्री, बढ़ई, लोहार, घरेलू सहायक, रेहड़ी-पटरी वाले, खेतिहर मजदूर, ऑटो चालक और इसी तरह के अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग इसके पात्र हैं। जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाया है और जिनकी जानकारी सही तरीके से दर्ज है वे सभी इस आर्थिक सहायता के हकदार हैं। सरकार की कोशिश है कि समाज के सबसे कमजोर तबके तक यह मदद समय पर और बिना किसी अवरोध के पहुंचे।
अपनी किस्त की जानकारी प्राप्त करना अब श्रमिकों के लिए बेहद सरल हो गया है और इसके लिए कहीं जाने की भी जरूरत नहीं है। ई-श्रम की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना आधार नंबर डालकर कोई भी लाभार्थी अपने भुगतान की स्थिति तुरंत देख सकता है। नजदीकी बैंक शाखा में जाकर पासबुक अपडेट करवाना भी एक आसान तरीका है जिससे पता चलता है कि खाते में राशि आई है या नहीं। इसके अतिरिक्त आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आने वाले एसएमएस के जरिए भी भुगतान की सूचना तुरंत मिल जाती है।
यदि किसी कारणवश किस्त की राशि खाते में नहीं पहुंची है तो इसके लिए कुछ बुनियादी बातों की जांच करनी चाहिए। सबसे पहले यह देखें कि आधार नंबर सही है या नहीं और क्या बैंक खाता उससे लिंक है। नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी पर जाकर अपने दस्तावेजों की दोबारा जांच करवाएं और अगर कोई जानकारी पुरानी है तो उसे तुरंत अपडेट करवाएं। ई-श्रम हेल्पलाइन पर कॉल करके भी समस्या का समाधान मांगा जा सकता है क्योंकि सरकार ने इसी उद्देश्य से यह सुविधा उपलब्ध कराई है।
आधार लिंकिंग और सही बैंक विवरण इस पूरी प्रक्रिया की जान है इसलिए इन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। यदि आधार मोबाइल से लिंक नहीं है तो सरकारी अधिसूचनाएं समय पर नहीं मिल पातीं और लाभार्थी को पता ही नहीं चलता कि उसके लिए कोई राशि जारी हुई है। बैंक खाता नंबर में एक भी अंक की गलती पूरे भुगतान को रोक सकती है इसलिए इसे एक बार फिर से जांच लें। इन तीन चीजों — सही आधार, सक्रिय मोबाइल और सही बैंक खाता — को दुरुस्त रखना ही डीबीटी लाभ पाने की सबसे पहली शर्त है।
भविष्य में ई-श्रम कार्ड के जरिए और भी अधिक सुविधाएं मजदूरों तक पहुंचाई जाने की योजना है जो इस पहल को और भी व्यापक बनाएगी। सरकार इस कार्ड को पेंशन योजनाओं और स्वास्थ्य बीमा से भी जोड़ने पर काम कर रही है ताकि श्रमिकों को बुढ़ापे और बीमारी में भी सहारा मिल सके। आने वाले वर्षों में यह कार्ड असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक संपूर्ण सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन सकता है। इसलिए जिन श्रमिकों ने अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया है उन्हें जल्द से जल्द नजदीकी सीएससी सेंटर पर जाकर यह काम पूरा करवा लेना चाहिए।
यह योजना सिर्फ एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह उन करोड़ों हाथों की पहचान है जो देश की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करते हैं। जब एक राजमिस्त्री या घरेलू कामगार को सरकारी योजना का लाभ मिलता है तो यह सिर्फ उसके परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की प्रगति होती है। सरकार का यह कदम उस वर्ग के लिए सम्मान और सुरक्षा दोनों का प्रतीक है जो अपने श्रम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। श्रमिकों से यही अनुरोध है कि वे अपनी जानकारी सदा अद्यतन रखें और सरकारी सूचनाओं पर ध्यान देते रहें ताकि किसी भी लाभ से वंचित न रह जाएं।









