E-Shram Card – भारत एक विशाल देश है जहाँ लाखों-करोड़ों मेहनतकश लोग हर दिन कड़ी धूप और ठंड में काम करते हैं। ये लोग इमारतें बनाते हैं, सड़कें बिछाते हैं, घरों में झाड़ू-पोंछा करते हैं और रिक्शा चलाकर दूसरों को उनकी मंजिल तक पहुँचाते हैं। लेकिन इन श्रमिकों की अपनी जिंदगी की मंजिल अक्सर अंधेरे में खो जाती है, खासतौर पर तब जब उनकी उम्र बढ़ने लगती है और शरीर साथ देना बंद कर देता है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सबसे बड़ी तकलीफ यह है कि उनके पास कोई स्थायी नौकरी नहीं होती और न ही कोई तय तनख्वाह। आज काम मिला तो घर का चूल्हा जला, कल नहीं मिला तो भूखे रहना पड़ा। ऐसे में जब कमाने की उम्र निकल जाती है, तो ये मजदूर दूसरों के सामने हाथ फैलाने पर मजबूर हो जाते हैं। यही सोचकर सरकार ने ई-श्रम कार्ड जैसी एक अहम पहल शुरू की है जो इन श्रमिकों की जिंदगी बदलने का माद्दा रखती है।
ई-श्रम कार्ड दरअसल एक पहचान पत्र से कहीं ज्यादा है। यह उन तमाम मजदूरों को सरकारी तंत्र से जोड़ने का माध्यम है जो अब तक सिस्टम से बाहर थे। जब कोई मजदूर इस कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करता है, तो उसे एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर मिलता है जो पूरे देश में मान्य होता है। इस नंबर के जरिए सरकार उस मजदूर तक सीधे मदद पहुँचा सकती है बिना किसी बिचौलिए के।
इस कार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मजदूरों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करता है। पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुविधा और आपदा के समय सहायता जैसी चीजें अब इन मजदूरों की पहुँच में आ सकती हैं। जो लोग कभी सोच भी नहीं सकते थे कि उन्हें भी सरकारी मदद मिलेगी, उनके लिए यह कार्ड एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।
पेंशन की बात करें तो यह मजदूरों के बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा बन सकती है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी योजनाएँ ई-श्रम कार्ड धारकों को साठ साल की उम्र के बाद हर महीने नियमित राशि देने का वादा करती हैं। इसके लिए मजदूर को अपनी कमाई में से थोड़ा-थोड़ा अंशदान करना होता है और सरकार भी उतनी ही राशि अपनी तरफ से जोड़ती है।
यह व्यवस्था इसलिए खास है क्योंकि इसमें मजदूर पर एकमुश्त बोझ नहीं पड़ता। हर महीने बहुत कम राशि जमा करने पर भी बुढ़ापे में एक सम्मानजनक पेंशन मिलती है। यही छोटी-सी बचत एक दिन उस मजदूर को दूसरों पर निर्भर होने से बचा सकती है और उसे आत्मनिर्भर बना सकती है।
पेंशन मिलने का सबसे गहरा असर मजदूर की मानसिक स्थिति पर पड़ता है। जब किसी इंसान को पता होता है कि भविष्य में भी उसका गुजारा होगा, तो वह आज भी ज्यादा शांति से और पूरी लगन से काम कर सकता है। मानसिक तनाव कम होने से उसकी उत्पादकता बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता भी सुधरती है।
इसके अलावा पेंशन मिलने से परिवार पर भी बोझ कम होता है। आज के दौर में बच्चों के ऊपर भी अपनी जिम्मेदारियाँ होती हैं और माँ-बाप का खर्च उठाना कई बार उनके लिए भी मुश्किल हो जाता है। जब बुजुर्ग माँ-बाप को खुद पेंशन मिलती है, तो परिवार में आर्थिक संतुलन बना रहता है और रिश्तों में भी तनाव नहीं आता।
ई-श्रम कार्ड बनवाने की प्रक्रिया जानबूझकर सरल और मुफ्त रखी गई है ताकि हर मजदूर इसका फायदा उठा सके। नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए यह काम किया जा सकता है। जरूरत होती है सिर्फ आधार कार्ड, एक चालू मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी की।
रजिस्ट्रेशन होने के बाद मजदूर के नाम पर कार्ड जारी होता है जिस पर उसका यूनिवर्सल नंबर अंकित होता है। यह कार्ड उस मजदूर की एक ऐसी पहचान है जो सरकारी दफ्तरों में भी मान्य है और जिसके जरिए वह भविष्य में कई तरह की सुविधाएँ पा सकता है। यह प्रक्रिया एक बार की है और इसके फायदे जीवन भर मिलते हैं।
हालाँकि एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि बहुत से मजदूरों को इन योजनाओं की जानकारी ही नहीं है। शहरों के नुक्कड़ पर बैठे मजदूर, गाँवों में खेत में काम करने वाले किसान मजदूर और घरों में काम करने वाली महिलाएँ अक्सर सरकारी योजनाओं की दुनिया से अनजान रहती हैं। जागरूकता की यह कमी उन्हें उनके हक से दूर रखती है।
इसलिए जरूरी है कि पंचायत स्तर से लेकर शहरी वार्डों तक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ। स्थानीय भाषाओं में जानकारी दी जाए, स्कूलों और मंदिरों में इसके बारे में बताया जाए और मजदूर संगठन इस काम में आगे आएँ। जब हर मजदूर को अपने अधिकारों की जानकारी होगी, तभी इन योजनाओं का असली मकसद पूरा होगा।
समाज की नजर से देखें तो असंगठित मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देना केवल उनकी मदद नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के विकास में निवेश है। जब करोड़ों मेहनतकश लोग सुरक्षित और स्वस्थ रहेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। एक खुशहाल और सुरक्षित श्रमिक वर्ग ही किसी भी देश की असली ताकत होती है।
भविष्य में इस योजना को और बेहतर बनाने की जरूरत है। पेंशन के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर और कौशल विकास जैसी सुविधाएँ भी जोड़ी जाएँ तो यह कार्ड मजदूरों की पूरी जिंदगी का साथी बन सकता है। सरकार के पास जो डेटाबेस तैयार हो रहा है, उसका सही उपयोग इस दिशा में बड़े काम आ सकता है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि ई-श्रम कार्ड और उससे जुड़ी पेंशन सुविधा उन हाथों के लिए एक सच्चा सम्मान है जिन्होंने इस देश को बनाया है। जो मजदूर सारी जिंदगी दूसरों के लिए छत बनाते रहे, उन्हें बुढ़ापे में एक सुरक्षित छत मिलना उनका हक है। अगर हर पात्र मजदूर इस योजना से जुड़ जाए, तो एक ऐसा भारत बनेगा जहाँ मेहनत का फल सबको बराबरी से मिलता है और कोई भी बुजुर्गावस्था में बेसहारा नहीं रहता।









