E-Shram Card Yojana – भारत एक विशाल देश है जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा रोज कमाकर रोज खाने पर निर्भर रहता है। ये वे लोग हैं जो सुबह होते ही घर से निकल जाते हैं और शाम को थकान लेकर वापस आते हैं। इनमें ईंट-पत्थर उठाने वाले मजदूर, खेतों में पसीना बहाने वाले किसान, सड़क किनारे ठेला लगाने वाले व्यापारी और घरों में काम करने वाली महिलाएं सभी शामिल हैं। इनकी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था चलती है, लेकिन इनके बुढ़ापे की सुरक्षा का कोई पक्का इंतजाम नहीं होता।
यही सोचकर केंद्र सरकार ने ई-श्रम कार्ड योजना की नींव रखी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों को एक व्यवस्थित ढांचे के भीतर लाना है। जब तक इन मजदूरों का सरकारी रिकॉर्ड में नाम नहीं होगा, तब तक उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ समय पर नहीं मिल सकता। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण इन मजदूरों को एक आधिकारिक पहचान देता है जो उनके हितों की रक्षा में मददगार साबित होती है।
इस योजना का दायरा बहुत व्यापक है और इसमें समाज के अनेक वर्गों को शामिल किया गया है। रिक्शा चालक से लेकर घरेलू नौकर तक, कचरा बीनने वाले से लेकर छोटे दुकानदार तक, सभी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं। शर्त केवल यह है कि आवेदक किसी नियमित सरकारी नौकरी में न हो और आयकर का भुगतान न करता हो। यानी जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, उन तक यह सुविधा पहुंचाना ही इस योजना का मूल मंत्र है।
बहुत से लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि ई-श्रम कार्ड बनवाते ही हर महीने तीन हजार रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। लेकिन यह सच्चाई से परे है और इस भ्रम को दूर करना बेहद जरूरी है। असल में यह कार्ड मजदूरों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी विशेष पेंशन योजनाओं से जोड़ने का माध्यम है। इन योजनाओं में समय पर शामिल होकर और नियमित अंशदान देकर ही बुढ़ापे में पेंशन का लाभ मिल सकता है।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना उन मजदूरों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है जो 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच हैं। इस योजना में शामिल होने के बाद मजदूर को हर महीने एक छोटी सी राशि का योगदान करना होता है जो उनकी उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है। सरकार भी उतनी ही राशि अपनी तरफ से इसमें जोड़ती है, जिससे मजदूर पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। जब यह मजदूर 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तब उसे हर महीने तीन हजार रुपये की पेंशन उसके बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है।
तीन हजार रुपये की मासिक पेंशन भले ही बड़ी रकम न लगे, लेकिन उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ी बात है जिनके पास बुढ़ापे में कमाई का कोई जरिया नहीं होता। जब शरीर थक जाता है और मेहनत करने की ताकत नहीं रहती, तब यही पेंशन उनकी दवाइयों, खाने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में काम आती है। इससे बुजुर्ग मजदूरों को अपने बच्चों या रिश्तेदारों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता और उनकी आत्मनिर्भरता बनी रहती है।
ई-श्रम कार्ड की एक और खास विशेषता यह है कि इसमें दुर्घटना बीमा सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है। निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों को अक्सर खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और दुर्घटना का जोखिम हमेशा बना रहता है। यदि किसी पंजीकृत मजदूर के साथ काम के दौरान कोई गंभीर हादसा होता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है। यह सुविधा उस परिवार के लिए एक बड़ा सहारा बन जाती है जो अचानक अपना कमाने वाला खो देता है।
इस योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सरकार और मजदूरों के बीच एक मजबूत संवाद का सेतु बनाती है। जब किसी मजदूर का नाम और जानकारी सरकारी डेटाबेस में दर्ज हो जाती है, तो भविष्य में कोई भी नई योजना लागू होने पर उसे सीधे लाभ मिल सकता है। अब उसे बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं और न ही किसी बिचौलिए को पैसे देने पड़ते हैं। यह पारदर्शिता और सरलता इस योजना को और भी प्रभावी बनाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सूचना और जागरूकता की कमी है, वहां अभी भी बहुत से मजदूर इस योजना से अनजान हैं। उन्हें यह नहीं पता कि थोड़ी-सी जानकारी और एक सरल पंजीकरण प्रक्रिया उनके भविष्य को किस तरह सुरक्षित कर सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे इन मजदूरों तक पहुंचकर उन्हें जागरूक करें। एक बार पंजीकरण हो जाने के बाद इस योजना के दरवाजे उनके लिए खुल जाते हैं।
महिला मजदूरों के लिए भी यह योजना विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि उनका काम अक्सर घरों तक सीमित रहता है और समाज में उनके योगदान को कम आंका जाता है। घरों में काम करने वाली महिलाएं, सफाई कर्मचारी और छोटे-मोटे व्यवसाय करने वाली महिलाएं भी इस योजना में पंजीकरण कराकर सुरक्षा पा सकती हैं। यह उनके लिए न केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है, बल्कि एक आधिकारिक पहचान पाने का अवसर भी है। समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने में यह छोटा-सा कदम बड़ा बदलाव ला सकता है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूर इस देश की सबसे मेहनती और जरूरी आबादी में से एक हैं, लेकिन सामाजिक सुरक्षा के मामले में वे हमेशा पीछे रहे हैं। ई-श्रम कार्ड योजना इस खाई को पाटने की एक ईमानदार कोशिश है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए और हर पात्र मजदूर तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो, तो लाखों परिवारों का भविष्य बेहतर बन सकता है। अंत में सभी पात्र श्रमिकों से यही अपील है कि वे इस योजना की सही जानकारी सरकारी स्रोतों से प्राप्त करें और बिना देर किए पंजीकरण कराकर अपने भविष्य को सुरक्षित करें।





