Gold Silver Price Today – भारतीय संस्कृति में सोने और चांदी का महत्व केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी है। शादी-विवाह हो, कोई त्योहार हो या किसी नए काम की शुरुआत—इन कीमती धातुओं की चमक हर अवसर पर नजर आती है। यही कारण है कि इनकी कीमतों में आने वाला हर बदलाव आम जनता की जिंदगी को किसी न किसी रूप में प्रभावित करता है। जब भी बाजार में इन धातुओं के दामों में उतार-चढ़ाव होता है, तो लोग तुरंत इसकी जानकारी लेने की कोशिश करते हैं।
हाल के कारोबारी सत्र में सर्राफा बाजार में एक उल्लेखनीय घटना देखने को मिली। सोने और चांदी दोनों की कीमतों में एक साथ गिरावट दर्ज हुई, जिसने बाजार में हलचल मचा दी। यह खबर उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से सोना खरीदने या उसमें निवेश करने की योजना बना रहे थे। कीमतों में आई इस नरमी ने एक बार फिर यह साबित किया कि सर्राफा बाजार कितना गतिशील और संवेदनशील होता है।
सोने के विभिन्न कैरेट का ताजा हाल
सोने की शुद्धता को कैरेट में मापा जाता है और हर कैरेट का अपना अलग महत्व और उपयोग होता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है और इसका भाव आज लगभग 1,59,000 से 1,60,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रहा। इस श्रेणी का सोना मुख्यतः निवेश के उद्देश्य से बार और बिस्किट के रूप में खरीदा जाता है। जो लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं, वे अधिकतर इसी कैरेट को प्राथमिकता देते हैं।
22 कैरेट सोना आभूषण उद्योग की रीढ़ माना जाता है। आज इसकी कीमत लगभग 1,46,000 से 1,48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब दर्ज की गई। देश के अधिकांश सुनार और ज्वेलरी कारीगर इसी कैरेट के सोने में गहने तैयार करते हैं क्योंकि यह टिकाऊ भी होता है और दिखने में भी शानदार लगता है। इसीलिए शादियों और खास मौकों पर 22 कैरेट की ज्वेलरी सबसे ज्यादा खरीदी जाती है।
18 कैरेट सोना आधुनिक फैशन ज्वेलरी में सबसे अधिक उपयोग होता है। आज इसका भाव करीब 1,19,000 से 1,22,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रहा। डायमंड और रत्न जड़ित आभूषणों में यही कैरेट सबसे उपयुक्त माना जाता है। युवा पीढ़ी के बीच यह कैरेट विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि इसमें डिजाइन की विविधता अधिक होती है।
चांदी की कीमतों में भी दिखी नरमी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुझान देखा गया। आज चांदी का भाव लगभग 2,45,000 से 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहा, जो पिछले कारोबारी सत्र से कम था। चांदी की यह गिरावट केवल ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ा। चांदी एक ऐसी धातु है जिसकी मांग विभिन्न उद्योगों में लगातार बनी रहती है।
चांदी का उपयोग सौर ऊर्जा पैनलों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चिकित्सा क्षेत्र और बैटरी निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमतें केवल सर्राफा बाजार से नहीं बल्कि वैश्विक उद्योगों की मांग से भी तय होती हैं। जब वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादन धीमा पड़ता है तो चांदी की मांग घटती है और कीमतें नीचे आती हैं। इस आपसी संबंध को समझना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
कीमतों में गिरावट के पीछे के कारण
सोने और चांदी के दाम एक ही कारण से नहीं बदलते, बल्कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक मिलकर इन पर असर डालते हैं। वैश्विक बाजार में जब भी बड़े निवेशक मुनाफावसूली करते हैं और बिकवाली शुरू होती है, तो भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक स्थिरता के संकेत मिलने पर निवेशक सुरक्षित संपत्ति की बजाय शेयर बाजार जैसे अन्य विकल्पों की ओर रुख कर लेते हैं।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग में कमी आती है, जिससे कीमतें नीचे आ जाती हैं। इसके अलावा अमेरिका सहित विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो लोग फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करना पसंद करते हैं और सोने में रुचि घट जाती है।
खरीदारों के लिए यह समय कितना फायदेमंद?
कीमतों में आई गिरावट को अनुभवी निवेशक अक्सर एक बेहतरीन मौके के रूप में देखते हैं। जो लोग लंबे समय से सोना खरीदने का इरादा रखते थे, उनके लिए यह एक उचित समय हो सकता है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय को केवल गिरती कीमतों के आधार पर नहीं लेना चाहिए, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। एकमुश्त बड़ी राशि लगाने की बजाय चरणबद्ध खरीदारी का तरीका अपनाना जोखिम को कम करता है।
ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण है। कम दाम पर सोना मिलने से गहनों की कुल लागत में कमी आती है, जिससे बजट का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। शादी का सीजन पास हो या कोई त्योहार, ऐसे समय में यदि कीमतें कम हों तो खरीदारी और भी सुविधाजनक हो जाती है।
सोना-चांदी खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
सोने या चांदी की खरीदारी करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना हमेशा फायदेमंद होता है। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें क्योंकि यह सरकारी शुद्धता प्रमाण होता है और धोखाधड़ी से बचाता है। खरीद के बाद पक्का बिल लेना न भूलें जिसमें वजन, कैरेट, मेकिंग चार्ज और GST का स्पष्ट उल्लेख हो। यह बिल भविष्य में सोना बेचते समय या बीमे का दावा करते समय बेहद काम आता है।
चांदी खरीदते समय भी विश्वसनीय और प्रतिष्ठित ज्वेलर से ही खरीदारी करें। बिल में वजन और कीमत की सटीक जानकारी होना जरूरी है। इसके अलावा निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदना हो तो डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इन माध्यमों में भंडारण की चिंता नहीं होती और तरलता भी बेहतर रहती है।
सोना और चांदी भारतीय जीवन में केवल धातुएं नहीं हैं, ये समृद्धि, सुरक्षा और संस्कृति का प्रतीक हैं। बाजार में आई इस ताजा गिरावट को न तो अनदेखा करना सही है और न ही बिना सोचे-समझे इसका लाभ उठाने की जल्दबाजी करनी चाहिए। सही जानकारी, सटीक समझ और सोच-समझकर लिया गया निर्णय ही किसी भी निवेश को सफल बनाता है। इसलिए खरीदारी से पहले बाजार की पूरी स्थिति को परखें और फिर एक समझदार फैसला लें।









