Senior Citizen Train – भारतीय रेलवे न केवल देश का सबसे बड़ा परिवहन तंत्र है, बल्कि यह करोड़ों नागरिकों की दैनिक जिंदगी से गहराई से जुड़ा हुआ है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैले इस विशाल नेटवर्क पर हर दिन असंख्य यात्री अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं। इन यात्रियों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण वर्ग उन बुजुर्गों का है जो अपने परिजनों से मिलने, इलाज के लिए या तीर्थयात्रा पर जाने के लिए ट्रेन का सहारा लेते हैं। ऐसे वरिष्ठ यात्रियों की विशेष जरूरतों को समझते हुए रेलवे प्रशासन ने कुछ अहम बदलावों की घोषणा की है जो उनके यात्रा अनुभव को बेहतर बनाएंगे।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ शारीरिक क्षमता में स्वाभाविक रूप से कमी आती जाती है और यात्रा के दौरान इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। भीड़ भरे स्टेशनों पर भागदौड़, भारी सामान उठाना और लंबी दूरी तय करके सही डिब्बे तक पहुंचना बुजुर्गों के लिए कठिन और थकाऊ हो जाता है। अनेक वरिष्ठ नागरिकों को घुटनों की तकलीफ, सांस की समस्या या दृष्टि संबंधी दिक्कतें होती हैं, जिनके कारण स्वतंत्र रूप से यात्रा करना उनके लिए जोखिमपूर्ण बन जाता है। इन्हीं वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए दो प्रमुख योजनाओं को नए सिरे से और अधिक प्रभावशाली तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।
प्राथमिकता सहायता: बुजुर्गों को मिलेगा विशेष संबल
स्टेशन पर पहुंचने के क्षण से लेकर ट्रेन में बैठने तक का सफर कई बुजुर्ग यात्रियों के लिए एक चुनौती बन जाता है। विशाल रेलवे स्टेशनों में अलग-अलग प्लेटफार्मों तक जाने के लिए लंबे रास्ते तय करने पड़ते हैं और पैदल चलने में अक्षम व्यक्तियों के लिए यह बेहद कष्टदायक हो सकता है। इसी समस्या का समाधान करते हुए रेलवे ने प्राथमिकता सहायता सेवा को दोबारा पूरी तरह सक्रिय कर दिया है, जो अब और अधिक व्यापक स्तर पर काम करेगी। इस सेवा के जरिए जरूरतमंद बुजुर्गों को व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि उन्हें थकान और असुविधा से बचाया जा सके।
इस योजना के तहत स्टेशन के प्रवेश द्वार से लेकर सीधे ट्रेन के निर्धारित डिब्बे तक बुजुर्ग यात्री की सहायता के लिए एस्कॉर्ट यानी सहयोगी कर्मचारी की व्यवस्था की गई है। बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सहायता काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं जहां उन्हें अलग से और प्राथमिकता के आधार पर सेवा मिलेगी। ट्रेन रवाना होने से पहले बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों को अन्य यात्रियों से पहले बोर्डिंग की सुविधा दी जाएगी, जिससे भीड़ में धक्का-मुक्की से होने वाले हादसों से बचा जा सकेगा। पचहत्तर वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को इस सेवा का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
निचली बर्थ का अधिकार: आराम की गारंटी
रेल यात्रा में निचली बर्थ सबसे अधिक मांग वाली सीट होती है, क्योंकि इस पर बैठना और लेटना दोनों ही सुविधाजनक होते हैं। ऊपरी या बीच की बर्थ पर चढ़ने के लिए शारीरिक फुर्ती और ताकत की जरूरत होती है, जो बुजुर्गों में अक्सर कम हो जाती है। सीढ़ी से ऊपर चढ़ते समय फिसलने या गिरने का खतरा भी बना रहता है, जिससे गंभीर चोट लग सकती है। इसीलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए निचली बर्थ की उपलब्धता न केवल सुविधा बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है।
इस जरूरत को मान्यता देते हुए भारतीय रेलवे ने वरिष्ठ नागरिक लोअर बर्थ कोटे को और अधिक कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साठ वर्ष या इससे अधिक आयु के पुरुष यात्री तथा अट्ठावन वर्ष या उससे अधिक की महिला यात्री इस विशेष कोटे का लाभ उठाने के पात्र हैं। टिकट आरक्षण करते समय लोअर बर्थ प्राथमिकता का विकल्प चुनने पर कंप्यूटर प्रणाली उपलब्ध सीटों में से निचली बर्थ आवंटित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। रेलवे कर्मचारियों को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि इस कोटे का उपयोग सही ढंग से और केवल पात्र यात्रियों के लिए हो।
किराया रियायत का सवाल और वर्तमान स्थिति
वर्ष 2020 के बाद से वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली किराया छूट को निलंबित कर दिया गया था, जो पहले पुरुष यात्रियों को 40 प्रतिशत और महिला यात्रियों को 50 प्रतिशत तक की रियायत प्रदान करती थी। इस निर्णय के बाद से बुजुर्ग यात्री और उनके परिजन लगातार इस छूट को पुनः बहाल करने की मांग करते आ रहे हैं। हालांकि रेलवे की ओर से अभी तक इस विषय में कोई ठोस और अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रेलवे बोर्ड के संकेतों से यह जरूर लगता है कि भविष्य में इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाया जा सकता है, लेकिन निश्चित जानकारी के लिए आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।
फिलहाल किराया रियायत की बजाय सुविधाओं और सहूलियतों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्राथमिकता सहायता और लोअर बर्थ कोटे का प्रभावी क्रियान्वयन इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं जो अभी तत्काल राहत प्रदान करते हैं। किराया छूट की वापसी के लिए जनप्रतिनिधियों और यात्री संगठनों की ओर से मांग जारी है और उम्मीद है कि सरकार इस पर जल्द विचार करेगी। वर्तमान में बुजुर्ग यात्रियों को उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी तैयारी
इन सभी विशेष सुविधाओं का पूरा और सही लाभ उठाने के लिए बुजुर्ग यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय ही सजग रहना होगा। ऑनलाइन या काउंटर से टिकट बुक करते समय अपनी वास्तविक आयु सही-सही दर्ज करना अनिवार्य है, क्योंकि इसी आधार पर प्राथमिकता सेवाएं मिलती हैं। निचली बर्थ प्राथमिकता का विकल्प बुकिंग फॉर्म में स्पष्ट रूप से चुनें और यह सुनिश्चित करें कि आवेदन में यह दर्ज हो गया है। यात्रा के दिन अपना आधार कार्ड, वरिष्ठ नागरिक प्रमाण पत्र या कोई अन्य वैध पहचान पत्र अवश्य साथ रखें।
स्टेशन पहुंचने पर यदि किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो तो संकोच न करते हुए हेल्प डेस्क से संपर्क करें और अपनी जरूरत बताएं। रेलवे कर्मचारी इन सेवाओं के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं और वे बुजुर्गों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। किसी भी शिकायत या असुविधा की स्थिति में रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है। समय पर स्टेशन पहुंचने की कोशिश करें ताकि बिना हड़बड़ी के सभी सुविधाओं का आराम से उपयोग किया जा सके।
बुजुर्गों का सम्मान, रेलवे की जिम्मेदारी
भारतीय रेलवे का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा और सम्मान के प्रति संवेदनशील है। प्राथमिकता सहायता सेवा और लोअर बर्थ कोटे की मजबूत वापसी से लाखों बुजुर्ग यात्रियों को अपनी यात्रा अधिक आत्मविश्वास के साथ करने का अवसर मिलेगा। यह व्यवस्था केवल शारीरिक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों को यह अनुभव देती है कि समाज और व्यवस्था उनकी परवाह करती है। एक सभ्य और संवेदनशील समाज की पहचान इसी बात से होती है कि वह अपने बड़े-बुजुर्गों का किस प्रकार ख्याल रखता है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता करता है।









